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Title:baabul kaa ghar chhod ke goree Movie:Rakhi Singer:Chorus Music:Husnlal-Bhagatram Lyricist:Sarshar Sailani
बाबुल का घर छोड़ के गोरी
हो गई आज पराई रे
डोली देख जियारा डोले
आँख नीर भर आई रे
( न्यारी जग की रीत री सखियाँ
कौन किसी का मीत री सखियाँ ) -२
झूठी सबकी ()
किसने प्रीत निभाई रे
बाबुल का घर छोड़ के गोरी
हो गई आज पराई रे
डोली देख जियारा डोले
आँख नीर भर आई रे
जिन गलियों में बचपन बीता
खोली आँख जवानी ने
उन गलियों से किया किनारा
सखियों की पटरानी ने
भईया का मन भर-भर आये
रोत चली मा जाई रे
बाबुल का घर छोड़ के गोरी
हो गई आज पराई रे
डोली देख जियारा डोले
आँख नीर भर आई रे
पी के प्यार में खो कर गोरी
हमको भूल ना जाना
रोज़ नहीं तो कभी-कभी
दो अक्शर लिख भिजवाना
धीरे-धीरे मधुर सुरों में
यही कहे शहनाई रे
( बाबुल का घर छोड़ के गोरी
हो गई आज पराई रे
डोली देख जियारा डोले
आँख नीर भर आई रे ) -२