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Title:gulaamee kaa ghanaa andheraa roko zulmon kee aandhee ko Movie:Aazaad Desh Ke Ghulaam Singer:Kavita Krishnamurthy, Mohammed Aziz Music:Laxmikant, Pyarelal Lyricist:Sameer
गुलामी का घना अँधेरा भारत में था छाया
इन्क़लाब का नारा गांधी नेहरू ने दोहराया
भगतसिंह आज़ाद ने अपने लहू की नदी बहा दी
जानें लुटा के वीरों ने आज़ादी हमें दिला दी
रोको ज़ुल्मों की आंधी को नफ़रत का लहू मत बहने दो
कम से कम प्यार की धरती पर तो प्यार को ज़िंदा रहने दो
रोको ज़ुल्मों की आंधी ...
भूख गरीबी भारी चौराहों पर लुट गई नारी
घर में घुस कर गोली मारी पकड़ा गया न अत्याचारी
इन्सानी रूहों के अन्दर समा गया है हैवान दरिंदा
बेच रहा बेटी की अस्मत जला दिया दुल्हन को ज़िंदा
जिनकी कोख से पैदा हुए उसे इज़्ज़त के गहने दो
रोको ज़ुल्मों की आंधी ...
कटे जिस्म को और कहां तक काटोगे बतलाओ
इक माँ को कितने हिस्सों में बांटोगे बतलाओ
कटे हुए टुकड़ों को गर तुम जोड़ सको तो जोड़ो
मार के पत्थर अपनी माँ का सर ऐसे न फोड़ो
अंग अंग ज़ख्मी है क्यों ज़ख्मों को सहने दो
रोको ज़ुल्मों की आंधी ...
चीख रही है भारत माता गांधी गांधी वापस आओ
आज़ाद देश की मैं गुलाम आज़ादी मुझे दिलाओ
लिपट गई है तुमसे आकर अपनी भारत माता
बचा लो इसकी लाज मेरे भारत के भाग्य विधाता