kabhee aah lab pe machal gaee - - ghulam ali

Title:kabhee aah lab pe machal gaee - - ghulam ali Movie:non-Film Singer:Ghulam Ali Music:unknown Lyricist:Rasheed Kamaal

English Text
देवलिपि


कभी आह लब पे मचल गई कभी अश्क़ आँख से ढल गये
वो तुम्हारे ग़म के चराग़ हैं कभी बुझ गये कभी जल गये

मैं ख़याल-ओ-ख़ाब की महफ़िलें न ब-कद्र-ए-शौक़ सजा सका
तेरी इक निगाह के साथ ही मेरे सब इरादे बदल गये

कभी रंग में कभी रूप में कभी छाँव में कभी धूप में
कहीं आफ़ताब-ए-नज़र हैं वो कहीं माहताब में ढल गये

जो फ़ना हुये ग़म-ए-इश्क़ में उन्हें ज़िंदगी का न ग़म हुआ
जो न अपनी आग में जल सके वो पराई आग में जल गये

था उन्हें भी मेरी तरह जुनूँ तो फिर उनमें मुझमें ये फ़र्क़ क्यूँ
मैं गरिफ़्त-ए-ग़म से न बच सका वो हुदूद-ए-ग़म से निकल गये