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sulagatee hain aankhen gale se lagaa lo ki jee chaahataa hai
Title:sulagatee hain aankhen gale se lagaa lo ki jee chaahataa hai Movie:Insaaf/ The Final Justice Singer:Anuradha Paudwal, Mohammed Aziz Music:Anand, Milind Lyricist:Sameer
सुलगती हैं आँखें तरसती हैं बाहें गले से लगा लो कि जी चाहता है
मुझे खाक़ कर दो मुझे राख कर दो मुझे फूंक डालो कि जी चाहता है
सुलगती हैं ...
उधर भी है तूफ़ां इधर भी है तूफ़ां भंवर से निकालो कि जी चाहता है
सुलगती हैं ...
यहां तक तो पहुंचे यहां तक तो आए सनम तुझ पे डालूं ज़ुल्फ़ों के साए
ये रुकना मचलना मचलकर स.म्भलना ये परदे हटा दो कि जी चाहता है
सुलगती हैं ...
बहारों के दिन हैं जवानी की रातें ये दो चार हैं मेहरबानी की रातें
नशा आ रहा है सबर जा रहा है ये रातें मना लो कि जी चाहता है
सुलगती हैं ...