vo ban sanvar ke chale hain ghar se

Title:vo ban sanvar ke chale hain ghar se Movie:Muskaan (Non-Film) Singer:Pankaj Udhas Music:Pankaj Udhas Lyricist:Zafar Gorakhpuri

English Text
देवलिपि


वो बन संवर के चले हैं घर से
हैं खोए खोए से बेख़बर से
दुपट्टा ढलका हुआ है सर से
ख़ुदा बचाए बुरी नज़र से
वो बन संवर के ...

कभी जवानी की बेखुदी में
जो घर से बाहर कदम निकालो
सुनहरे गालों पे मेरी मानो
तुम एक काला सा तिल सजा लो
बदन का सोना चुरा ले सारा
कोई नज़र उठ के कब किधर से
ख़ुदा बचाए ...

ये नर्म-ओ-नाज़ुक हसीन से लब
के जैसे दो फूल हों कंवल के
ये गोरे मुखड़े पे लाल रंगत
के जैसे होली का रंग छलके
स.म्भालो इन लम्बी चोटियों को
लिपट न जाएँ कहीं कमर से
ख़ुदा बचाए ...

ये शहर पत्थरों का शहर ठहरा
कहाँ मिलेगी यहाँ मोहब्बत
ये शीशे जैसा बदन तुम्हारा
मेरी दुआ है रहे सलामत
तुम्हारे सपनों की नन्हीं कलियाँ
बची रहें धूप के असर से
ख़ुदा बचाए ...